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मौलवी साहब

शाम का समय था मैं अपने साथी दिलीप के साथ चाय की चुस्कियां ले रहा था तभी मैंने जिज्ञासा वश उसे पूछा क्या तुमने कभी भूतों को देखा है, उसने मुस्कुराते हुए कहा, मैंने तो अजीबो गरीब घटना देखी है दरअसल दिलीप लखीसराय का रहनेवाला था, उसने बताया मैं रात ke 9 बज रहे थे मैं अपने घर के बाहर अपनी गली में खडा था, तभी एक मौलवी साहब उस रास्ते से गुजर रहे थे, उस मौलवी ने दिलीप को हाथ से रास्ते से हटने का इशारा किया, दिलीप कुछ समझ नही पाया की ये इसने जो मुझे इशारा किया ये मेरे बगल से क्यों नही चला जाता है पर बिना सोचे समझे दिलीप रास्ते से हट गया। मौलवी साहब वहाँ से गुजर गए, पर दिलीप ने देखा की कुछ दूर जाकर वह मौलवी वहाँ से गायब हो गया, दिलीप के तो जैसे होश फाख्ता हो गए, दिलीप उन सारे सवाल में आज भी उलझा है की आखिर वो मौलवी साहब कौन थे, जिसने उनसे रास्ते से हटने के लिए कहा, आखिर उस गाँव के मौलवी साहब कौन थे, आखिर उनकी कहानी क्या है, इस सवाल का जवाब शायद दिलीप के पास हो या नही लेकिन मैं इतना तो जानता हूँ की मौलवी साहब इस दुनिया के आदमी तो नही थे जो यहाँ से ताल्लुक रखते, वो जिन्नो की दुनिया के थे, एक ऐ...

होली

साथ हँसते साथ गाते, काश तुम्हारे साथ होली खेल पाते, कभी तुम किसी गांव की गली में छिप जाती, चुपके से तुम पकड़ी जाती, फ़िर मै तुम्हें रंग ल गाता, फूल सा गाल तुम्हारा गुलाल की तरह खिल जाता, सुख दुख मे कभी गले मिल पाते, मैं कदंब की डाल पर वंशी बजाता, तुम पानी भरन को जमुना पे जाती, मैं तुम्हें कंकड़िया मार कर सताता, अपनी शरारत पे इठलता, काश तुम्हारे साथ होली खेल पाता, कभी भागती तु भी जमुना तिरे, मैं तेरे पीछे पीछे आता, तु गिर जाती तो मैं तुम्हें उठाता, गुलाल के रंगो से तेरी चुनरी को रंग जाता, काश तुम्हारे साथ होली खेल पाता.

नैना देवी और जिउना मौर

चित्र
प्राकृतिक सौंन्दर्य की छटा बिखेरती नैना देवी का मंदिर, नैना देवी के इतिहास में जिउना मौर का किस्सा बहोत ही प्रचलित है, नैना देवी के नाम के साथ लोग उनके भक्त जिउना मौर को भी याद करते हैं, कहते हैं नैना देवी के मंदिर में  एक बार डाकुओं ने डाका डाला ,जिउना  मौर नाम के डकैत ने नैना देवी के मंदिर के सारे गहने लूट लिए, गहने लुट कर वह मंदिर से जाने लगा, तभी मंदिर के पूजारी ने जिउना मौर को समझाया की तु माँ के जेवर लौटा दे पर जिमना मौर अपने गर्व में चूर चूर था, तभी पुजारी ने उसे समझाते हुए कहा देख ले, तु जिस दर से नैना देवी के गहने लेकर जा रहा है,याद रखना कल नैना देवी के इसी चौखट पे तु माथा टेकने आयेगा. फिर भी जिउना मौर कहाँ मानने वाला था वह माँ के सारे जेवर लेकर चला गया. रात होने को आयी, काफी थका होने के कारण जिमना मौर अपनी खाट पे सो गया. सपने में जिउना मौर ने मां काली का भयावह रूप देखा जिसको देखकर वह बुरी तरह से डर गया और रात को उठकर बैठ गया और फिर वह पछताने लगा की नैना देवी के गहने चुराकर मैने बहुत गलत किया है,उसने फैसला किया क्या सुबह होते ही वह नैना देवी के...