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प्रेमानन्द बाबा और चुड़ैल

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बाबा ने खुद बताया जब उनका सामना एक चुड़ैल से हुआ l प्रेमा बाबा सुबह जंगल में शौच के लिए जा रहे था, तभी उन्होंने देखा एक औरत लाल घाघरा में उनके आगे खडी हो जाती थी, तो उन्होंने सोचा कोई गाओं की औरत है जिस रास्ते जाएगी मै उस रास्ते नहीं जाऊंगा, उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया, लेकिन जैसे वो दूसरे रास्ते में गए वो फिर आगे खड़ी हो गयी, अब वो समझ गए की  ये चुड़ैल है, और उन होने जोर से राधा नाम का उच्चारण किया लाडली किशोरी राधा, येबोलते ही वो चुड़ैल अदृश्य जो गयी, तो ऐसे हुआ था प्रेमा बाबा का भी चुड़ैल से सामना l उन्होंने कोई मंत्र भी नहीं पढ़ा केवल राधा नाम के उच्चारण मात्र से ही वो चुड़ैल भाग गयी तो यहाँ राधा नाम की महिमा और शक्ति का भी पता चलता है, राधा नाम की क्या ताकत है, राधा नाम लेने से ही चुड़ैल भाग गयी तो बहुत प्रेत चुड़ैल भागने के लिया राधा नाम से भी क्या बड़ा मंत्र हो सकता है, और फिर आपको कोई संकट आये या चुड़ैल आपके पीछे पड़ जाये तो हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करे ऐसा संत महापुरुष से ले कर शास्त्र में भी वर्णन है l तो प्रेमा बाबा ने फिर से एक बार साबित कर दिया की चुड़ैल, भूत प...

पूज्य श्री भाई जी हनुमान प्रसाद जी पोद्दार

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पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार जिन्हे लोग प्यार से भाई जी कहते थे l पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार  किसी परिचय का मोहताज नहीं हैँ l सन 1892 मेँ राजस्थान के रतनगढ़ मेँ जन्मे थे, माता के बचपन मेँ ही गुजर जाने के बाद  इनकी दादी ने इनका पालन किया l गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक और संपादक  श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार l गीता प्रेस को ऊँचे मुकाम तक इन्होने पहुँचाया l सनातन धर्म के प्रचारक, भगवतप्राप्त महपुरुष थे l इनके सत्संग और प्रवचन बहुत ही मशहूर हैँ, बड़े अलौकिक चेहरे पर दिव्य तेज एक ऐसे महापुरुष जो किसी की तरफ देख ले तो उसे भगवत प्राप्ति हो जाय l इनकी इच्छामात्र से श्री राधा बाबा को भगवान श्री कृष्ण के दर्शन हुए lपूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार जिन्होंने रामचरित मानस की पुस्तक प्रकाशित कर बहुत ही कम कीमत पर जन -जन तक पहुँचाया इन्होंने अपने सत्संग मेँ नाप जाप और शरणागति पर बहुत जोर दिया l जिन्होंने लोगों को यह सीख दी की परमार्थ से ही परमात्मा प्रसन्न होते हैँ l परमार्थ मेँ ही सच्चा सुख है l पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार महारा...

सदना कसाई

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जब भक्त की बात हो तो सदना कसाई की कहानी भी बड़ी मशहूर है l भगवान के भक्त में इस सदना कसाई का भी नाम आता है l सदना कसाई का काम करता था l यह पेशा उनके पूर्वजों से चला आ रहा था l सदना पशुओं को मारता नहीं था बल्कि बाजार से माँस लाकर बेचता था l सदना भगवान का भजन किया करता था l वो सत्संग में जाता था l एक दिन की बात है l सदना अपना काम निपटाकार सत्संग में चला गया l सदना ध्यान लगाकर सत्संग सुन रहा था, सत्संग समाप्त हो गया सारे लोग वहां से चले गए l पर सदना सत्संग में इतना लीन हो चूका था की वो अपनी जगह पर बैठा रह गया l पंडित जी ने जब यह देखा तो सदना की साधुता देखकर सदना के हाथ में एक पत्थर देते हुए कहा की लो ये सच के भगवान हैँ l  दरअसल वो कोई साधारण पत्थर नहीं था, पत्थर के रूप में भगवान शालीग्राम थे l सदना उस पत्थर को लेकर घर आ गया अब सदना तराजू में उस बटखरे की जगह उसी पत्थर को रख दिया जो स्वयं भगवान शालीग्राम थे l सदना तराजू के एक पलड़े में उस पत्थर को रखता और दुसरे पलड़े में मांस रखकर तौलने लगा l पंडित की बात का विश्वास रख के की ये सच के भगवान हैँ l सदना माँस तौलते हुए उस पत्थ...

श्रीमदभागवतम

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ये कहानी श्रीमदभागवत पुराण की है जो महर्षि वेद व्यास द्वारा लिखित है प्राचीन काल में तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित एक ग्राम में आत्मदेव नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी धुंधली के साथ रहते थे आत्मदेव एक धनी ब्राह्मण थे उन्हें धन की कोई कमी नहीं थी पर उन्हें अपनी संतान नहीं होने का दुख था इस कारण वह बहुत दुखी रहते थे l उन्हें बस यही चिंता सता रही थी कि संतान प्राप्ति नहीं होने के कारण मुझे नरक की प्राप्ति होगी मेरे धन का कौन सुख भोग करेगा यह सोच विचार कर अपने जीवन को अर्थहीन समझकर वे अपने प्राण त्यागने के विचार से जंगल की तरफ चल दिए जहां उन्हें एक साधु मिला और उन्होंने आत्मदेव से पूछा कि तुम बहुत दुखी मालूम पड़ते हो क्या बात है l तभी आत्मदेव ने अपनी संतान हीनता की बात बताई कहा बिना संतान के मुझे मुक्ति कैसे मिलेगी, मैं नरक में जाउंगा लगता है मेरे पितर मुझसे नाराज हैं l मेरे घर की गाय भी बाँझ हैं मेरे दुख को दूर कीजिये, बिना पुत्र के मेरा जीवन व्यर्थ है इस पर साधु ने कहा प्रकृति से कभी खेलना नही चाहिए यही नियती है तुम्हारे जीवन में , तुम्हारे जीवन में संतान सुख नही है और आगे सात जन्म त...

कुत्ते का रोना

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कुत्ते का रोना कहते हैं अशुभ माना जाता है, कई तथ्यों के अनुसार यह साबित हो चूका है की कुत्ते जब रोते हैं तो वहां घटनाएं होती हैंl सोचा जो लोग जानना चाहते हैं ताकि वो इन अनसुलझी रहस्यों को समझ सके , मैं ऐसी रहस्यमई चीजों से पर्दा हटाऊँ l दरअसल मतलब क्या है क्या कुत्तों को पहले पता चल जाता है उन्हें मौत दिखाई देती है तो कई जगह ये देखा गया है की जहाँ कुत्ते रोते हैं वहां कोई ना कोई मौत होती है दरअसल कुत्तों को यमुदूतों को देखने की शक्ति होती है कुत्ते जब यमदूत देखते है तो उस घर में मौत के आने की आहट सुन रोने लगते हैं इन्हें भूत प्रेत भी दिखाई देते है, कहते हैं प्रेतों के पैर नही होते जब प्रेतों का आकार बढ़ता देखते हैं तो कुत्ते इनपे भौँकने लगते हैं, इधर मैंने इंटरनेट पर जब एक पेरानोर्मल्स एक्सपर्ट की वीडियो देखी वो कुत्तों पे थीं, कहानी ये थीं की रात को उसके घर में कुत्ते रो रहे थे तो वो उस जगह देखने लगा तभी उन्हें एक सफ़ेद कपड़े पहने आदमी दिखाई दिया उस परानोर्मल्स एक्सपर्ट ने उससे पुछा किसकी मौत आयी है तो सफेदपोश आदमी बोला तेरी नही है तो वो सोचने लगा की अब इस घर में कौन मरेग...

नाम महिमा

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नाम जाप जो कभी समाप्त नही होगा, नाम की महिमा अवर्णननीय है, नाम में भगवान बैठे हुए हैं, नाम नामी एक है, वे कभी एक दूसरे से अलग नही हैं, नाम जो परम धाम तक पहुंचाएगा, नाम में दाहक शक्ति है, वो सारे पाप को नष्ट कर देतीं है नाम नामी को भी अपने अधीन कर लेती है, नाम जाप में कोई नियम नहीं है इसे कहीं भी नाम लिया जा सकता है, इसे अशुद्ध अवस्था में भी जपा जा सकता हैlभाव से या कुंभाव से नाम जपेंगे तो पाप अवश्य नष्ट हो जायेगा lनाम नामी से भी बड़ा है नाम में वो सामर्थ्य है की वो भगवान को भी अपने अधीन कर लें l नाम भव सिंधु से पार करानेवाला है l नाम जापक पर माया नही चलती है l नाम में भगवान को प्रकट करने की शक्ति है l नाम जप, तप,दान सबसे बड़ा है, नाम सर्वोपरि है l जिसने नाम लिया भगवान सच्चीदानंद प्रभु का, उसे और कोई साधन करने की आवश्यकता नही है, नाम के आगे सारे साधन फीके हैं l नाम महाप्रलय तक नष्ट नही होता है, नाम जापक को किसी तीर्थ जाने की आवश्यकता नही हैl दस नाम अपराध से बच के नाम जपना चाहिए अन्यथा नाम जप का फल नही मिलता l कलियुग में नाम जप से ही भागवत प्राप्ति है l दस नाम अपराध है  1. ...

सोनिया

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सोनिया की मां सौतेली थी, उसकी सौतेली मां उसकी शादी एक शराबी से करना चाहती थी, या जान सोनिया गांव के ही किसी लड़के के साथ भाग गई, मुझे समझ में अभी नहीं आ रहा है, कि सोनिया ने उस लड़के के साथ शादी की या सोनिया उसकी रखैल बन कर रह रही थी, सोनिया अभी किस हाल में है, सोनिया जिंदा भी है या नहीं ये कोई नहीं जानती, सोनिया अपने गांव वाले के लिए मर चुकी थी, सोनिया अपने बाप के लिए भी मर चुकी थी, नहीं तो उसका बाप उसे दिल्ली देखने के लिए जरूर जाता। औरत ही औरत की दुश्मन निकली, सौतेली माँ के जारज़न उसने ये कदम उठाया lउस लड़के ने सोनिया के शरीर का इस्तेमाल किया और बाद में उसे चोद दिया, जिस साथी को ने अपने लिए चुना, वो भी कुत्ता निकला, हड्डी का रस चूसा और छोड़ दिया। मुझे तो बस यहीं समझ आया कि मर्द की तो जात ही कुट्टी थी, बस एक रहस्य बन कर रह गई सोनिया की ये दर्द भरी कहानी।