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नाम महिमा

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नाम जाप जो कभी समाप्त नही होगा, नाम की महिमा अवर्णननीय है, नाम में भगवान बैठे हुए हैं, नाम नामी एक है, वी कभी एक दूसरे से अलग नही हैं, नाम जो परम धाम तक पहुंचाएगा, नाम में दाहक शक्ति है, वो सारे पाप को नष्ट कर देतीं है नाम नामी को भी अपने अधीन कर लेती है, नाम जाप में कोई नियम नहीं है इसे कहीं भी नाम लिया  जा सकता है, इसे अशुद्ध अवस्था में भी जपा जा सकता हैlभाव से या कुंभाव से नाम जपेंगे तो पाप अवश्य  नष्ट हो जायेगा. नाम नामी से भी बड़ा है नाम में वो सामर्थ्य है की वो भगवान को होने अधीन कर लें l नाम भाव सिंधु से पार करानेवाला है l नाम जापक पर माया नही चलती है l नाम में भगवान को प्रकट करने की शक्ति है l नाम जप,तप,दान सबसे बड़ा है, नाम सर्वोपरि है l जिसने नाम लिया भगवान सच्चीदानंद प्रभु का, उसे और कोई साधन करने की आवश्यकता नही है, नाम के आगे सारे साधन फीके हैं l नाम महाप्रलय तक नष्ट नही होता है, नाम जापक को किसी तीर्थ जाने की आवश्यकता नही हैl दस नाम अपराध से बच के नाम जपना चाहिए अन्यथा नाम जप का फल नही मिलता l कलियुग में नाम जप से ही भागवत प्राप्ति है l दस नाम अपराध है...

सोनिया

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सोनिया की मां सौतेली थी, उसकी सौतेली मां उसकी शादी एक शराबी से करना चाहती थी, या जान सोनिया गांव के ही किसी लड़के के साथ भाग गई, मुझे समझ में अभी नहीं आ रहा है, कि सोनिया ने उस लड़के के साथ शादी की या सोनिया उसकी रखैल बन कर रह रही थी, सोनिया अभी किस हाल में है, सोनिया जिंदा भी है या नहीं ये कोई नहीं जानती, सोनिया अपने गांव वाले के लिए मर चुकी थी, सोनिया अपने बाप के लिए भी मर चुकी थी, नहीं तो उसका बाप उसे दिल्ली देखने के लिए जरूर जाता। औरत ही औरत की दुश्मन निकली, सौतेली माँ के जारज़न उसने ये कदम उठाया lउस लड़के ने सोनिया के शरीर का इस्तेमाल किया और बाद में उसे चोद दिया, जिस साथी को ने अपने लिए चुना, वो भी कुत्ता निकला, हड्डी का रस चूसा और छोड़ दिया। मुझे तो बस यहीं समझ आया कि मर्द की तो जात ही कुट्टी थी, बस एक रहस्य बन कर रह गई सोनिया की ये दर्द भरी कहानी।

अमर फल

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ये कहानी उज्जैन नगरी की है l जहाँ राजा भर्तिहरि का शासन था l राजा भर्तिहरि एक सदाचारी और न्यायप्रिय राजा थे l राजा भर्तिहरि अपनी पत्नी रानी पिंगला से बहुत प्यार करते थे l रानी पिंगला रूप सौंदर्य की मालकिन थी एक कमनीय नारी थी l राजा भर्तिहरि रानी पिंगला के प्यार में जैसे पागल थे l पर भाग्य का खेल बहुत निराला था l एक दिन रानी अपने शयनकक्ष की खिड़की से अस्तबल की तरफ देख रही थी, रानी पिंगला एक अश्वपाल पर मरती थी जिसकी लम्बी कद काठी और गठीला शरीर था l रानी पिंगला उस अश्वपाल से रोज अकेले में मिला करती थी l लेकिन एक दिन राजा भर्तिहरि के छोटे भाई विक्रमादित्य ने रानी पिंगला को अस्तबल की तरफ से आते देख लिया l विक्रमादित्य ने सोचा ये बात राजा भर्तिहरि को बतानी चाहिए l विक्रमदित्य जैसे ही राजा से मिलने पहुंचे उसे पहले ही पिंगला ने राजा से मिलकर ये कहा की महाराज विक्रमादित्य की बुरी नजर मुझ पर है, राजा भर्तिहरि उसकी बातों में आ गए l राजा भर्तिहरि ने विक्रमादित्य को बिना सोचे समझे को राज्य से निकाल दिया l उसी समय सिद्ध गुरु गोरखनाथ उज्जैन राज महल पहुंचे, राजा ने उनका खूब आदर सत्कार क...

yaad

कुछ याद आया और मुद्दे गुजर गई हवा का झोन का आया पता चला वाह बगल से

वेवफ़ा

सारा अरमान भले दिल में दफन रह जाएगा, और एक बार वो वेवफ़ा चली गई, उसके जाने के बाद तू कभी ना पछताएगा, अब जब तू उससे जायेगा, आखिरी बार उसका कब्र पी फूल चढ़ने जाएगा

इश्क़

चुप रहना आपकी फ़िदरत है, मैं आपसे बात किये बिना रह पाऊं ये मेरी आदत नहीं

कनेरी का सच

 ये कहानी भागलपुर जिले में जगदीशपुर के पास एक छोटे से गांव कनेरी की है।  ये कहानी मेरे ही ऑफिस में काम करनेवाले एक स्टाफ बंटी की है।  साल 2008, जब वह 12 साल का था। तो अपने दोस्तों के साथ मिलकर आम के बगीचे से आम चुराने का प्लान बनाया |  कनेरी गांव के पास आम का एक बहुत बड़ा बगीचा था|  बंटी अपने 3-4 दोस्तों के साथ रात को करीब 1 बजे आम का बगीचा पहुंचे। जैसे ही वे लोग आम का बगीचा पहुंचे उन्हें देखकर बहुत आश्चर्य हुआ क्यों कि वहां आम का पेड़ तो था पर उसमें आम नहीं था। जब कि दिन में उन्होंने पेड़ पर बहुत सारे आम लटके हुए देखे थे।सभी सोच में पड़ गए कि पेड़ पर दिन में तो आम थे पर रात को कहां गायब हो गए| तभी बंटी को जोर से लघुशंका लगी और वह एक पेड़ के नीचे लघुशंका करने लगा जब वह लघुशंका कर रहा था तभी उसे लगा जैसा कोई उसके गाल को छू रहा है उसने अटपटे ढंग से बालों को अपने चेहरे से हटा दिया लेकिन फिर वह बाल उसके गाल को छूने लगा| इस बार बंटी को बड़े जोर से गुस्सा आया और उसने उस बाल को जोर से खींचा तभी बंटी ने अपनी ति...