नाम महिमा
नाम जाप जो कभी समाप्त नही होगा, नाम की महिमा अवर्णननीय है, नाम में भगवान बैठे हुए हैं, नाम नामी एक है, वी कभी एक दूसरे से अलग नही हैं, नाम जो परम धाम तक पहुंचाएगा, नाम में दाहक शक्ति है, वो सारे पाप को नष्ट कर देतीं है नाम नामी को भी अपने अधीन कर लेती है, नाम जाप में कोई नियम नहीं है इसे कहीं भी नाम लिया जा सकता है, इसे अशुद्ध अवस्था में भी जपा जा सकता हैlभाव से या कुंभाव से नाम जपेंगे तो पाप अवश्य नष्ट हो जायेगा. नाम नामी से भी बड़ा है नाम में वो सामर्थ्य है की वो भगवान को होने अधीन कर लें l नाम भाव सिंधु से पार करानेवाला है l नाम जापक पर माया नही चलती है l नाम में भगवान को प्रकट करने की शक्ति है l नाम जप,तप,दान सबसे बड़ा है, नाम सर्वोपरि है l जिसने नाम लिया भगवान सच्चीदानंद प्रभु का, उसे और कोई साधन करने की आवश्यकता नही है, नाम के आगे सारे साधन फीके हैं l नाम महाप्रलय तक नष्ट नही होता है, नाम जापक को किसी तीर्थ जाने की आवश्यकता नही हैl दस नाम अपराध से बच के नाम जपना चाहिए अन्यथा नाम जप का फल नही मिलता l कलियुग में नाम जप से ही भागवत प्राप्ति है l दस नाम अपराध है 1. संतों और भक्तों की निंदा करना 2. शिव और विष्णु मशीन भेद समझना 3. वेद की निंदा करना 4 गुरु को साधारण मनुज्या समझना 5. नाम का सहारा लेकर पाप करना 6. नाम की महिमा पर श्रद्धा और विश्वास ना रखना 7. नास्तिक को नाम उयदेश करना 8.हरे कृष्ण महामंत्र को काल्पनिक समझना 9. हरे कृष्णा महामंत्र को वेदों के कर्मकांड की तरह एक शुभ कर्म समझना 10. पवित्र भगवन नाम में अर्थवाद का आरोप करना.
नाम जापक को कभी यम यातना नही भोगनी पडती है, उनसे भूत प्रेत पिशाच सभी दूर रहते हैं, नाम लेने वालों को भागवत धाम की प्राप्ति होती है वे भगवत स्वरुप हो जाते हैं.
भगवन नाम जापक के नाम को सुनकर दक्षिण दिशा के यमराज उनके सात जन्म के पाप को माफ़ कर देते है.
नाम जापक को अवश्य ही भागवत प्राप्ति होती है.
नाम अंदर और बाहर दोनों शुद्ध करके आपको भवन से मिला देगा. नाम जापक दूसरों का भी कल्याण करने की सामर्थ्य रखते हैं.
नाम भगवन की कृपा से ही जीहवा के अग्र भाग पर चलता है.
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