मैं अब जिनके बारे में लिखने जा रहा हुं।शायद उनकी जीवनी लिखने के लिए मेरे शब्द कम पङेंगे। हाॅलीवुड की मशहूर सेक्सी अदाकारा मर्लिन मुनरो। जिनका मुल नाम नोर्मा जीन मोर्टेनसेन था ।जिनका जन्म 1जुन 1926 को हुआ था। हालीवुड में सेक्स सिंबल के रुप में जानी जाने लगी।1950 के दशक में इनकी फिल्मों ने खुब ख्याति बटोरी। मर्लिन ने अपनी फिल्म सेवन इयर ईंच से हाॅलीवुड में धुम मचा दी।सेवन इयर ईंच में मर्लिन की उडती हुई स्कर्ट के सीन ने लोगों के होश उडा दिये । मर्लिन मुनरो अमेरिका की मशहूर अभिनेत्री ,माॅडल और गायिका। मर्लिन के हुस्न के चर्चे और मुस्कान के सभी कायल थे। मर्लिन की कामयाबी ने उसे रातोंरात सुपरस्टार बना दिया।मर्लिन ने अपने बारे में लिखा कि मैं अच्छी हुं लेकिन परी नही। मैं पाप तो करती हुं लेकिन मैं शैतान नही। अपने पाप को स्वीकार कर लेना मर्लिन को उसके सारे गुनाहों से मुक्त करता है। मर्लिन ने अपने बारे में कहा था कि मुझे सेक्स पसंद है ।मैं प्रकृति हुं।मैं इसके साथ चलना पसंद करती हुं। मर्लिन ये बताना चाहती थी लोगों को कि प्यार और सेक्स जिंदगी का...
ये कहानी उज्जैन नगरी की है l जहाँ राजा भर्तिहरि का शासन था l राजा भर्तिहरि एक सदाचारी और न्यायप्रिय राजा थे l राजा भर्तिहरि अपनी पत्नी रानी पिंगला से बहुत प्यार करते थे l रानी पिंगला रूप सौंदर्य की मालकिन थी एक कमनीय नारी थी l राजा भर्तिहरि रानी पिंगला के प्यार में जैसे पागल थे l पर भाग्य का खेल बहुत निराला था l एक दिन रानी अपने शयनकक्ष की खिड़की से अस्तबल की तरफ देख रही थी, रानी पिंगला एक अश्वपाल पर मरती थी जिसकी लम्बी कद काठी और गठीला शरीर था l रानी पिंगला उस अश्वपाल से रोज अकेले में मिला करती थी l लेकिन एक दिन राजा भर्तिहरि के छोटे भाई विक्रमादित्य ने रानी पिंगला को अस्तबल की तरफ से आते देख लिया l विक्रमादित्य ने सोचा ये बात राजा भर्तिहरि को बतानी चाहिए l विक्रमदित्य जैसे ही राजा से मिलने पहुंचे उसे पहले ही पिंगला ने राजा से मिलकर ये कहा की महाराज विक्रमादित्य की बुरी नजर मुझ पर है, राजा भर्तिहरि उसकी बातों में आ गए l राजा भर्तिहरि ने विक्रमादित्य को बिना सोचे समझे को राज्य से निकाल दिया l उसी समय सिद्ध गुरु गोरखनाथ उज्जैन राज महल पहुंचे, राजा ने उनका खूब आदर सत्कार क...
काशी जिसे मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जो भगवान शंकर के त्रिशूल की नोक पर बसा है ये प्रलय काल में भी नष्ट नहीं होगा l स्वयं भगवान शंकर प्रलय काल में भी इसकी रक्षा करेंगे l शिव पुराण के अनुसार काशी में जो भी मरता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है चाहे वो कितना ही बड़ा पापी क्यों ना हो ऐसी है काशी की महिमा l काशी में एक मच्छर भी मरे तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है l मै किसी महापुरुष की बात का खंडन नहीं करता पर काशी की महिमा ऐसी है की काशी में मरने वालों को अवश्य मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसा शिव पुराण और स्कन्द पुराण द्वारा प्रमाणित है l रहस्य ये है की भगवान शंकर काशी में मरनेवाले के कान में तारक मंत्र पढ़ते हैँ और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है l काशी भगवान विश्वनाथ के द्वारा सुरक्षित है l काशी में जो लोभी है, निंदक है, जो परस्त्रीगामी है जो व्यभिचारि है l उसे काशी में रहने का कोई अधिकार नहीं है l भगवान के भक्त दंडपानी को नियुक्त किया गया है की काशी को तुम सुरक्षित रखो, भगवान के भक्त दंडपानी द्वारा काशी में पापियों को प्रवेश नहीं है और भगवान शिव के वरदान से दंडपानी भक्त...
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