काशी की महिमा
काशी जिसे मोक्ष की नगरी कहा जाता है, जो भगवान शंकर के त्रिशूल की नोक पर बसा है ये प्रलय काल में भी नष्ट नहीं होगा l स्वयं भगवान शंकर प्रलय काल में भी इसकी रक्षा करेंगे l शिव पुराण के अनुसार काशी में जो भी मरता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है चाहे वो कितना ही बड़ा पापी क्यों ना हो ऐसी है काशी की महिमा l काशी में एक मच्छर भी मरे तो उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है l मै किसी महापुरुष की बात का खंडन नहीं करता पर काशी की महिमा ऐसी है की काशी में मरने वालों को अवश्य मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसा शिव पुराण और स्कन्द पुराण द्वारा प्रमाणित है l रहस्य ये है की भगवान शंकर काशी में मरनेवाले के कान में तारक मंत्र पढ़ते हैँ और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है l काशी भगवान विश्वनाथ के द्वारा सुरक्षित है l काशी में जो लोभी है, निंदक है, जो परस्त्रीगामी है जो व्यभिचारि है l उसे काशी में रहने का कोई अधिकार नहीं है l भगवान के भक्त दंडपानी को नियुक्त किया गया है की काशी को तुम सुरक्षित रखो, भगवान के भक्त दंडपानी द्वारा काशी में पापियों को प्रवेश नहीं है और भगवान शिव के वरदान से दंडपानी भक्तों को मुक्ति देते हैँ l भगवान शिब की कृपा के बिना कोई भी प्राणी काशी वास नहीं कर सकता है l काशी में गंगा को लाकर भागीरथ ने काशी की महिमा को और बढा दिया l कहते हैँ भगवान शिव की कृपा से काशी में कोई भी भूखा नहीं रहता है l काशी में किया गया कोई भी दान, गरीबों को खिलाया गया अन्न अनंत गुना फल देनेवाला और भगवान शिव के लोक की प्राप्ति करानेवाला है l काशी के कोतवाल काल भैरव काशी की रक्षा करते हैँ और भगवान शिव के अवतार काल भैरव की पूजा यहाँ पहले की जाती है और उनसे भगवान विश्वनाथ की पूजा की आज्ञा ली जाती है, काशी में काल और समय काल भैरव के द्वारा ग्रसित है l काशी में यहाँ उसका प्रभाव नहीं है, काशी में मरनेवाले को अमरत्व यानी मुक्ति मिलती है उसे जन्म- मरण से मुक्ति मिलती है l इसमें लिखी कोई भी बात मनगढ़ंत नहीं है, प्रमाणित है और शिव पुराण और स्कन्द पुराण से ली गयी है l जय हो काशी विश्वनाथ l
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