ओंकारेश्वर शिव


ओंकारेश्वर शिवलिंग द्वादाश ज्योतिर्लिंग में से एक, जो मध्य प्रदेश के खांडवा में स्थित है l राम के चौदह पीढ़ी पूर्व राजा मान्धाता ने भगवान शंकर को तपस्या करके 
यहाँ प्रकट किया था l ओंकारेश्वर यहाँ कि शयन आरती प्रसिद्ध है, ओंकारेश्वर के पुजारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी इसकी महिमा बताई,  भगवान शंकर और माँ पार्वती यहाँ प्रत्येक रात्रि शयन करने आते हैँ यहाँ उनकी रात्रि विश्राम स्थली है , शिवलिंग कि ब्रह्मा विष्णु महेश तीन रूप में यहाँ पुजा होती है , प्रणवाक्षर के मध्य में ये तीनो एक है l सभी ज्योतिर्लिंग के पास कोई नदी नहीं है जब कि नर्मदा मैया मंदिर के चारों तरफ जलेरी बनकर बहती है, भगवान शंकर मा पार्वती यहाँ शयन करते हैँ फिर 3 बजे सुबह महाकाल जाते हैँ वहां स्नान करते हैँ l
यहाँ कि कथा है एक बार बार भगवान शंकर माँ पार्वती के साथ यहाँ शयन के लिए आये, पार्वती माँ ने पूछा पुजारी ज़ी चौसर पासे में किसकी जीत होंगी, पुजारी बोला भोलेनाथ जीतेंगे, शिव- पार्वती दोनों मंदिर के अंदर चले गए l सुबह फिर भगवान शंकर माँ पार्वती मंदिर से निकले, माँ ने पुजारी से कहा , पुजारी ज़ी अपने कहा था भोले बाबा जीतेंगे, लेकिन मै जीती हूं, तुमने पिता का पक्ष लिया है, पक्षपात किया इसलिए मै तुम्हें श्राप देती हूं तू कोढ़ रोग से ग्रस्त हो जा l फिर भगवान शंकर माँ पार्वती वहां से चले गए, कुछ समय बाद वहां एक अप्सरा पूजा करने के लिए आयी, उसने पुजारी से पूछा, पुजारी ज़ी ये आपका हाल किसने किया, पुजारी ने सारी कहानी अप्सरा को बतायी और कहा कि माँ पार्वती ने मुझे कोढ़ का श्राप दिया है अप्सरा ने कहा मैं शिव ज़ी कि पूजा करके आती हूं और इस श्राप से मुक्ति का उपाय बताती हूं l अप्सरा जब शिव पूजन करके मंदिर से वापस आयी तो पुजारी से कहा कि आप सोलह सोमवार का व्रत कीजिये आप इस रोग से मुक्त हो जाईयेगा फिर पुजारी ने सोलह सोमवार का व्रत किया और माँ पार्वती के श्राप से मुक्ति पायी l ओंकारेश्वर शिवलिंग स्वंभु है ये स्वयं प्रकट हुआ है यहाँ अखंड ज्योत सालों  से जलती रहती है, बुझती नहीं है l नर्मदा नदी मंदिर के चारों और पहरा देती है, नर्मदा मैया के दर्शन मात्र से सारे पाप धूल जाते हैँ, नर्मदा का तो कंकड़ भी शंकर है, जय श्री ओंकारेश्वर शिव l

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