नशीली काली रात




तु नशीली काली रात है, जो अपने दामन में मुझे सुला रही है, ए सुहानी रात ना जाने कब से तु अपने दामन में मुझे सुलाने के लिए बुला रही है. तेरी काली जुल्फ है या सावन की घटा, या तुम हो कोई हिमाचल की प्रकृतिक छटा, तेरी ही गोद में कल कल झरन बहता है, मेरा दिल तेरी धड़कन से जैसे बातें करता रहता है. 
ये सावन आयेगी वो सावन जायेगी, कुछ भी कहूँ कम होगी,तेरी तारीफ में तो सारी उम्र बीत जायेगी. 

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