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इश्क़

चुप रहना आपकी फ़िदरत है, मैं आपसे बात किये बिना रह पाऊं ये मेरी आदत नहीं

कनेरी का सच

 ये कहानी भागलपुर जिले में जगदीशपुर के पास एक छोटे से गांव कनेरी की है।  ये कहानी मेरे ही ऑफिस में काम करनेवाले एक स्टाफ बंटी की है।  साल 2008, जब वह 12 साल का था। तो अपने दोस्तों के साथ मिलकर आम के बगीचे से आम चुराने का प्लान बनाया |  कनेरी गांव के पास आम का एक बहुत बड़ा बगीचा था|  बंटी अपने 3-4 दोस्तों के साथ रात को करीब 1 बजे आम का बगीचा पहुंचे। जैसे ही वे लोग आम का बगीचा पहुंचे उन्हें देखकर बहुत आश्चर्य हुआ क्यों कि वहां आम का पेड़ तो था पर उसमें आम नहीं था। जब कि दिन में उन्होंने पेड़ पर बहुत सारे आम लटके हुए देखे थे।सभी सोच में पड़ गए कि पेड़ पर दिन में तो आम थे पर रात को कहां गायब हो गए| तभी बंटी को जोर से लघुशंका लगी और वह एक पेड़ के नीचे लघुशंका करने लगा जब वह लघुशंका कर रहा था तभी उसे लगा जैसा कोई उसके गाल को छू रहा है उसने अटपटे ढंग से बालों को अपने चेहरे से हटा दिया लेकिन फिर वह बाल उसके गाल को छूने लगा| इस बार बंटी को बड़े जोर से गुस्सा आया और उसने उस बाल को जोर से खींचा तभी बंटी ने अपनी ति...

ज्वाला माई की खिचड़ी और गोरखनाथ

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ये कहानी नाथ पंथ के सिद्ध गुरु गोरखनाथ की है।  एक समय गुरु गोरखनाथ आध्यात्मिक भ्रमन पर थे तब शक्तिपीठ कांगड़ा के ज्वाला देवी पहुंचे।  ज्वाला देवी ने उन्हें खिचड़ी का निमंत्रण दिया।  यहां एक कुंड है जहां पानी उबलता रहता है, यहीं वह पात्र है जिसमें ज्वाला माई खिचड़ी बनाती है, गोरखनाथ ने अपनी बिभूति इस कुंड में डाल दी थी l  जिससे यहाँ पानी छूने पर ठंडा  है l बात यह थी कि गोरखनाथ वैष्णव थे और वहां मांस मदिरा चढ़ाया जाता था, इसलिए गोरखनाथ ने कहा ज्वाला माई मैं आपके   निमंत्रण को नहीं ठुकरा सकता, पर माई जो भिक्षा मांग कर लूंगा, उसीसे से खिचड़ी बनाना तो मैं खाऊंगा, ज्वाला माई पानी उबालने लगी, और गोरखनाथ भिक्षा मांगने चले गये।  इस कुंड का पानी उसी इंतजार में उबल रहा है, कि गोरखनाथ भिक्षामांग कर  लाएंगे, और ज्वाला माई के हाथ की बनी खिचड़ी खाएंगे।  कहते हैं ज्वाला मां अभी तक इंतजार कर रही है, इसी इंतज़ार में कुंड का पानी उबल रहा है, और अभी तक गोरखनाथ नहीं आए । इसी उपलक्ष्य में मकर संक्रांति को यहां खिचड़ी बनाई ज...