संदेश

होली

साथ हँसते साथ गाते, काश तुम्हारे साथ होली खेल पाते, कभी तुम किसी गांव की गली में छिप जाती, चुपके से तुम पकड़ी जाती, फ़िर मै तुम्हें रंग ल गाता, फूल सा गाल तुम्हारा गुलाल की तरह खिल जाता, सुख दुख मे कभी गले मिल पाते, मैं कदंब की डाल पर वंशी बजाता, तुम पानी भरन को जमुना पे जाती, मैं तुम्हें कंकड़िया मार कर सताता, अपनी शरारत पे इठलता, काश तुम्हारे साथ होली खेल पाता, कभी भागती तु भी जमुना तिरे, मैं तेरे पीछे पीछे आता, तु गिर जाती तो मैं तुम्हें उठाता, गुलाल के रंगो से तेरी चुनरी को रंग जाता, काश तुम्हारे साथ होली खेल पाता.

नैना देवी और जिउना मौर

चित्र
प्राकृतिक सौंन्दर्य की छटा बिखेरती नैना देवी का मंदिर, नैना देवी के इतिहास में जिउना मौर का किस्सा बहोत ही प्रचलित है, नैना देवी के नाम के साथ लोग उनके भक्त जिउना मौर को भी याद करते हैं, कहते हैं नैना देवी के मंदिर में  एक बार डाकुओं ने डाका डाला ,जिउना  मौर नाम के डकैत ने नैना देवी के मंदिर के सारे गहने लूट लिए, गहने लुट कर वह मंदिर से जाने लगा, तभी मंदिर के पूजारी ने जिउना मौर को समझाया की तु माँ के जेवर लौटा दे पर जिमना मौर अपने गर्व में चूर चूर था, तभी पुजारी ने उसे समझाते हुए कहा देख ले, तु जिस दर से नैना देवी के गहने लेकर जा रहा है,याद रखना कल नैना देवी के इसी चौखट पे तु माथा टेकने आयेगा. फिर भी जिउना मौर कहाँ मानने वाला था वह माँ के सारे जेवर लेकर चला गया. रात होने को आयी, काफी थका होने के कारण जिमना मौर अपनी खाट पे सो गया. सपने में जिउना मौर ने मां काली का भयावह रूप देखा जिसको देखकर वह बुरी तरह से डर गया और रात को उठकर बैठ गया और फिर वह पछताने लगा की नैना देवी के गहने चुराकर मैने बहुत गलत किया है,उसने फैसला किया क्या सुबह होते ही वह नैना देवी के...

नशीली काली रात

तु नशीली काली रात है, जो अपने दामन में मुझे सुला रही है, ए सुहानी रात ना जाने कब से तु अपने दामन में मुझे सुलाने के लिए बुला रही है. तेरी काली जुल्फ है या सावन की घटा, या तुम हो कोई नैना देवी की प्रकृतिक छटा, तेरी ही गोद में कल कल झरना बहता है, मेरा दिल तेरी धड़कन से जैसे बातें करता रहता है.  ये सावन आयेगी वो सावन जायेगी, तेरी कुछ भी कहूँ कम होगी,तेरी तारीफ में तो सारी उम्र बीत जायेगी. 

sanam

दरख़त दीवार पे जिस प्यार को महसूस करता हुँ वो हो तुम, कभी ढूंढता हुँ वो जगह पे जहाँ तुम हमसे मिला करती थी, एक बार फिर से मिलने आ जाओ ना तुम, ठंडी हवा के झोंकों में भी तुम्हें मैं महसूस करता हुँ, अपने दुपट्टे में छुपा लो मुझे, अपने बाहों में सुला लो मुझे, तुम्हारा मेरे गालो को चूमना मुझे याद है, चुपके से आ के तेरा दिल को धड़कना, और मुझे गले लगाना आज भी याद है, सनम तेरा वो आशिकाना याद है.सनम तेरा वो आशिकाना याद है

mahboob

जानेमन चलो तुम्हें कश्मीर दिखा दूँ, जमीन पे जन्नत इसी को कहते हैं, जो भी हो तुम बहोत खूब हो , तुम्हें ही तो महबूब कहते हैं

चांद

तेरे शरमाने से चांद शर्माना भूल जाता है, हुस्न तो तूने चांद को दिया है, क्यों तू मेरा दिल तोड़ कर चली जाती है, इतना तो बता ए चांद तू अपने चकोर को  छोड़ कर कहाँ  चली जाती है. 

दिल के आईने में

राही हूँ मैं तेरा साथी ये सफर तो देखो, जी भर के तुझे देखूँ कभी दिल के आईने में उतर के तो देखो