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फ़रवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लालबाई

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सन् 1890 की बात है।ये कहानी छत्तीसगढ़ की है।  जहाँ के राजा रणधीर सिंह थे। और रानी का नाम तारा था। रणधीर सिंह के दरबार में लालबाई नाम की नर्तकी थी। जो अपने नृत्य से महाराज का दिल बहलाया करती थी। जब वह नृत्य करती तो महल के दीवार पर भी उसके पैरों के घूंघरु की गूंज सुनाई देती। लालबाई के सुंदर नृत्य को देखकर रणधीर सिंह उसपर फ़िदा हो गए थे। लालबाई के नृत्य और गायन को देख, रणधीर सिंह लालबाई पर मर मिटे थे। लालबाई के मनमोहक नृत्य को देखकर राजा रणधीर सिंह ने लालबाई को राजनर्तकी  घोषित कर दिया था। राजदरबार में कोई भी पद मिलने पर उस जमाने में महल में ही उनके रहने खाने की मुफ्त व्यवस्था की जाती थी। राजनर्तकी होने के कारण लाल बाई अब महल में ही रहने लगी। लाल बाई के नृत्य का जादू रणधीर सिंह पर इस तरह सिर चढ़ कर बोल रहा था। रणधीर सिंह काम काज छोड़ कर, लालबाई के प्रेम में डूबे रहते। और उसके नृत्य का आनंद उठाया करते। लाल बाई के घूंघरु की गूँज से महल में एक अजीब सी मादकता छा जाती। रणधीर सिंह अब लालबाई के  प्रेम में कैद हो चुके थे। राजा रणधीर सिंह लालबाई के प्रेम में अपना राज ...

नेहरू और एडविना का प्रेम

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नेहरू जब एडविना से मिले। तब नेहरू एडविना को अपना दिल दे चुके थे । मैं 2 feb, 2021 को इंटर नेट देख रहा था। तभी इंटरनेट पर मेरी नजर नेहरू और एडविना की तस्वीर पर पड़ी। जिसपर नेहरू एडविना के होठों का चुम्बन ले रहे थे। कमला कौल की मौत के बाद ऐसा भी नही था। की नेहरू को कोई सदमा था। अगर कमला की मौत का उन्हें सदमा होता तो वो एडविना से कभी इश्क नही लड़ाते। एडविना लार्ड माउंटबेटन की वाइफ थी। जिन्होंने नेहरू और एडविना की बढ़ती नजदीकियों में कभी रोक लगाने की कोशिश नही की। और ना उनके रिश्तों में कभी दखलअंदाजी की। बल्कि इस रिश्ते को इसलिए  बढ़ावा दिया की,भारत का आसानी से बंटवारा हो सके। वे इसमें अपनी राजनिति साध रहे थे। बात सन् 1948 की  है। नेहरू 58 साल के थे, और एडविना 48 की। एडविना जहाँ भी घूमने जाती । नेहरू वहाँ ज़रुर जाते और वहाँ एडविना से उनका मिलना जुलना होता रहता। एक बार नेहरू नैनीताल गए थे। जहाँ रूसी मोदी ने अपने बेटे से कहा, नेहरू को डिनर के लिए बुला लो। जब मोदी के बेटे ने नेहरू को डिनर पे बुलाने के लिए,  होटल के कमरे का डोर ओपन किया तो नेहरू ने एडविना को अपनी बाह...

जंगल की चुड़ैल

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सन् 2005 की बात है। मेरे यहाँ राजु माँ नाम की एक बाई काम किया करती थी। उसकी उम्र करी ब 60 साल की थी। भूत प्रेत जैसी चीजों में दिलचस्पी होने के कारण एक दिन मैंने उनसे पूछा, राजु माँ आपने कभी भूत प्रेत देखा है। तभी उन्होंने मुझे अपनी कहानी सुनाई। सन् 1960 की बात है। मेरी शादी हुई थी। उस समय भागलपुर के बु ढा नाथ इलाके में जंगल हुआ करता था।शाम का समय था। मैं अपने मर्द के साथ बैलगाड़ी पर अपने ससुराल जा रही थी। बैलगाड़ी वाला अपनी गाड़ी जंगल में हाँक रहा था। हा हा हर र। रात हो चुकी थी। जंगल काफी बड़ा था।रास्ता नही दिखने के कारण गाड़ी वान ने लालटेंन जला ली। और बैल गाड़ी को जंगल में हाँकने लगा। हा हा हर र हर र चल चल। चलते चलते अचानक से बैल रुक गयी। बैल आगे नही बढ़ रही थी। बैलगाड़ी वाला कुछ समझ नही पाया। गाड़ी आगे क्यों नही बढ़ रही है। उसने देखा बैल गाड़ी का रास्ता रोके एक औरत खड़ी है। बैल चुपचाप अपनी जगह खड़ी थी। राजु माँ भी कुछ समझ नही पायी। तभी राजु माँ अपने पति से बोली, देखो तो उतर कर  गाड़ी आगे क्यों नही बढ़ रही है। राजू माँ के पति ने बैलगाड़ी से नीचे उतर कर देखा तो अचंभित र...