संदेश

mahboob

जानेमन चलो तुम्हें कश्मीर दिखा दूँ, जमीन पे जन्नत इसी को कहते हैं, जो भी हो तुम बहोत खूब हो , तुम्हें ही तो महबूब कहते हैं

चांद

तेरे शरमाने से चांद शर्माना भूल जाता है, हुस्न तो तूने चांद को दिया है, क्यों तू मेरा दिल तोड़ कर चली जाती है, इतना तो बता ए चांद तू अपने चकोर को  छोड़ कर कहाँ  चली जाती है. 

दिल के आईने में

राही हूँ मैं तेरा साथी ये सफर तो देखो, जी भर के तुझे देखूँ कभी दिल के आईने में उतर के तो देखो

एंजल

दुल्हन जैसे कोई सजी संवर आयी है, जन्नत से जैसे आज जमीन पर कोई परी उतर आयी है

सपनों की रानी

नागीन सी बलखाती हो तुम सपनों की रानी लगती हो तुमन,  मैंने पूछा कौन हो तुम तुमने कहा जो तुमने छोड़ दिया तेरा अतित हूँ मैं, जो मिटे ना तेरे प्यार की निशानी हूँ मैं, आओ मेरी रूहों में समा जाओ , तेरी जिन्दगी की आखिरी कहानी हूँ मैं.

मुमताज

हर जगह आपके हुस्न का आलम छाया हुआ है, मेरे दिल की तो मुमताज आप हैं, मैंने तो अपने दिल में ताजमहल बनाया हुआ है.

गज़ल

मोहब्बत में ना सही, नफरत में अपनी दो चार सुनाया करो, तेरी गाली भी मुझे ईमरती लगती है, खिड़की पे तो रोज मुलाकात होती है। कभी गली में भी मुझसे मिलने आ जाया करो।