मेरी गज़ल
1. खुदा का नूर हो तुम, जैसे लगता है मेरा महबूब हो तुम, क्या कहें जानेमन बहोत खूब हो तुम, बहोत खूब हो तुम।
2. तेरा प्यार का अफसाना बना हुआ है, खुदा भी तेरे हुस्न का अशिक् है जो तेरा दीवाना बना हुआ है
3. तेरे होठों से चांदनी बिखर रही है, जैसे लगता है, चांदनी अपने चांद के बाहों में सिमट रही है।
4. कभी तनहाई में तुमहे याद कर लेता हु, जब तेरी याद आती है तो कभी खुद से कभी आइने से बात कर लेता हु.
5. वो मनचले भी तेरे अंजुमन से छुट गए, बाकी जो बचा था वो तेरे रिंदे तुझे लूट गए।
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