पूज्य श्री भाई जी हनुमान प्रसाद जी पोद्दार
पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार जिन्हे लोग प्यार से भाई जी कहते थे l पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार किसी परिचय का मोहताज नहीं हैँ l सन 1892 मेँ राजस्थान के रतनगढ़ मेँ जन्मे थे, माता के बचपन मेँ ही गुजर जाने के बाद इनकी दादी ने इनका पालन किया l गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक और संपादक श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार l गीता प्रेस को ऊँचे मुकाम तक इन्होने पहुँचाया l सनातन धर्म के प्रचारक, भगवतप्राप्त महपुरुष थे l इनके सत्संग और प्रवचन बहुत ही मशहूर हैँ, बड़े अलौकिक चेहरे पर दिव्य तेज
एक ऐसे महापुरुष जो किसी की तरफ देख ले तो उसे भगवत प्राप्ति हो जाय l इनकी इच्छामात्र से श्री राधा बाबा को भगवान श्री कृष्ण के दर्शन हुए lपूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार जिन्होंने रामचरित मानस की पुस्तक प्रकाशित कर बहुत ही कम कीमत पर जन -जन तक पहुँचाया इन्होंने अपने सत्संग मेँ नाप जाप और शरणागति पर बहुत जोर दिया l जिन्होंने लोगों को यह सीख दी की परमार्थ से ही परमात्मा प्रसन्न होते हैँ l परमार्थ मेँ ही सच्चा सुख है l पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार महाराज को नारद जी ने भी दर्शन दिया था l दरअसल नारद जी के ज्ञान और गुणों को जानकर श्री हनुमान प्रसाद जो को नारद जी के दर्शन की लालसा होने लगी l एक रात नारद जी और अंगिरा ऋषि हनुमान प्रसाद जी के स्वप्न मेँ आये और कहा की में तुमसे कल 3 बजे मिलने आऊंगा l सुबह उठने पर हनुमान प्रसाद जी ने किसी से कुछ नहीं कहा और गीता वाटिका गोरखपुर जहाँ भाई जी रहा करते थे l गीता वाटिका की की कुटिया को साफ कर दिया और दो आसनी उनके लिए लगा दी l ठीक दोपहर 3 बजे दो ब्राह्मण वहां आये l पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी उन्हें प्रणाम कर गीता वाटिका की कुटिया के तरफ चल दिए l वे दोनों ब्राह्मण उनके पीछे पीछे चल दिए lपूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार जी उन दोनों को आसान पर बिठाया और स्वयं उनके चरणों के पास बैठ गए l आसन पर बैठते ही वे दोनों अपने असली रूप मेँ प्रकट हो गए l वे श्री हरि भक्त शिरोमणि श्री नारद मुनि और ऋषि अंगिरा थे l नारद जी ने श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार को बहुत सी
रहस्यमयी बाते बताई l वे श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार से उनकी भाषा हिंदी मेँ ही बात कर रहे थे l नारद मुनि जिनसे मिलते हैं वे जिस भाषा को जानते हैँ उनसे उसके भाषा मेँ ही बात करते हैँ l नारद जी श्री पूज्य श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार जी महराज से हमेशा मिला करते थे l जाते समय उन्होंने श्री हनुमान प्रसाद जी पोद्दार को कहा तुम जब मुझे याद करोगे में तुमसे मिलने अवश्य आऊंगा l यह कहकर श्री नारद जी और अंगिरा ऋषि अंतरध्यान हो गए l गीता वाटिका गोरखपुर जहाँ नारद जी और ऋषि अंगिरा का प्राकट्य हुआ था l उस प्राकट्य स्थली पर एक भव्य मंदिर का निर्माण हो चूका है l उस प्राकट्य स्थली पर श्री नारद जी और ऋषि अंगिरा जी की प्रतिमा मौजूद है l जब मै खुद गीता वाटिका गोरखपुर गया था सन 2018 में किसी काम के सिलसिले मेँ, तो मैंने ऐसे स्थली को बड़े गौर से देखा जहाँ पत्थरों पर बड़े अक्षरों मेँ लिखा था श्री नारद जी और ऋषि अंगिरा का प्राकट्य स्थली गीतावाटिका गोरखपुर l लोग काफी संख्या मेँ इस प्राकट्य स्थल का दर्शन करने आते हैँ l ऐसे महान पुरुष थे श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार जी महाराज, ऐसा प्रभाव था उनका की दृष्टि मात्र से वो किसी को भी भगवत प्राप्ति करा सकते थे ऐसी शक्ति और प्रभाव केवल चैतन्य महाप्रभु मेँ ही था l
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