नरक
नरक जो दक्षिण की और पृथ्वी से नीचे जल के उपर स्थित है जिसे यमलोक कहते हैँ, यहाँ सूर्य भगवान के पुत्र यमराज अपने सेवकों सहित रहते हैँ और भगवान के नियम का उल्लंघन नहीं करते हुए मृत प्राणियों को उनके दुष्कर्मों के अनुसार दंड देते हैँ lजहाँ पापियों को दंड दिया जाता हैl जहाँ के राजा दंडपाणी यमराज हैँ जिनका नाम सुनकर पृथ्वीलोक के प्राणी का ह्रदय काँप जाता हैँ l पापियों के लिए यमराज और पुण्यात्मा प्राणियों के लिए धर्मराज हैँ lजो आत्महत्या करते है वो यहीं रहते हैँ , जो पाप करते हैँ उन्हें यमदूत ले जाते हैँ, वो नरक जाते हैँ lजो पुण्य करते हैँ उन्हें यमराज मतलब धर्मराज ले जाते हैँ उन्हें स्वर्ग मिलता है जो भगवान के भक्त हैँ जिन्होंने जीवन भर भगवान को जपा है वो भगवत धाम जाते हैँ उन्हें लेने भगवान के पार्षद आते हैँ lकर्मों का लेखा जोखा चित्रगुप्त ज़ी के पास है वो पापपुण्य का हिसाब रखते हैँ उस हिसाब से फिर दंड तय होता है, lयमुदूतों द्वारा केवल पापी मनुष्य लाये जाते है, इनके आने पर प्राणियों के मल मूत्र छुट जाते हैँ क्यों की ये दिखने में बड़े भयानक होते हैँ l वे भगवान श्री हरि ,शंकर और भगवती के भक्त के पास नहीं आते हैँ क्यों कि भक्तों का चेहरा यमुदूतों को बहोत भयानक दीखता है l
नरक कई प्रकार के हैँ ऐसे 21 बताये गए हैँ जिसका वर्णन इस प्रकार है :- तामिश्र, अंधतामिश्र, असिपत्रावान, कुम्भीपाक, रौरव, वैतरनी,सुकरमुख, अविची,विशशन कालसूत्री,अयहपान हैँ lजो प्राणी मै इस शरीर से हूं केवल अपने परिवार कुटुंब के पालन पोषण में लगे रहते हैँ, परमार्थ नहीं करते और दूसरे प्राणी से द्रोह करते हैँ रौरव नरक में पडते हैँ जो क्रूर मनुष्य अपना पेट पालने के लिए पशु पछियों को रानधते हैँ उनका मांस खाते हैँ वे पापी मनुष्य कुम्पाभीक नरक में गिरते हैँ उन्हें खौलते तेल में रांधा जाता है जो मनुष्य ब्राह्मण वेद माता पिता का विरोध करता है वो मनुष्य कालसूत्री नरक में जाते हैँ वह दस हजार योजन का जगह है जहाँ ताम्बे की भूमि है वहां पापियों का शरीर जलता है और वो छटपटाते हैँ l जो मनुष्य खटमल, मच्छर को मारते हैँ वो अंधकुप नरक में गिरते हैँ क्यों कि भगवान ने उन्हें खून पीने की वृति दी है, जो पुरुष स्त्री व्यभिचार करते हैँ वो ताप्तसुर्मी नामक नरक में गिरते हैँ उस मृत मनुष्य को लोहे के स्त्री परुष से आलिंगन कराया जाता है l जो मनुष्य यक्ष की तरह पैसा बचाने में लगे रहते हैँ l पैसे को पैदा करने बढ़ाने में लगे रहते है उसके लिए पाप करते हैँ वो सुचिमुख नरक में गिरते हैँ, उस मृत प्राणी के अंग को सुई धागे से बिनधा जाता है l जो मुर्ख प्राणी अन्धविश्वासके कारण यज्ञ में पशुओं का वध करते है वो विशशण नमक नरक में गिरते है वहाँ उन्हें यमदूत बहोत पीड़ा देकर उन्हें काटते है l इसी तरह हजारों नरक का वर्णन है l इसी तरह पाप पुण्य को स्वर्ग नरक में भोग कर मनुष्य इस मृत्युलोक में वापस लौट आते हैँ l
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