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सोनिया

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सोनिया की मां सौतेली थी, उसकी सौतेली मां उसकी शादी एक शराबी से करना चाहती थी, या जान सोनिया गांव के ही किसी लड़के के साथ भाग गई, मुझे समझ में अभी नहीं आ रहा है, कि सोनिया ने उस लड़के के साथ शादी की या सोनिया उसकी रखैल बन कर रह रही थी, सोनिया अभी किस हाल में है, सोनिया जिंदा भी है या नहीं ये कोई नहीं जानती, सोनिया अपने गांव वाले के लिए मर चुकी थी, सोनिया अपने बाप के लिए भी मर चुकी थी, नहीं तो उसका बाप उसे दिल्ली देखने के लिए जरूर जाता। औरत ही औरत की दुश्मन निकली, सौतेली माँ के जारज़न उसने ये कदम उठाया lउस लड़के ने सोनिया के शरीर का इस्तेमाल किया और बाद में उसे चोद दिया, जिस साथी को ने अपने लिए चुना, वो भी कुत्ता निकला, हड्डी का रस चूसा और छोड़ दिया। मुझे तो बस यहीं समझ आया कि मर्द की तो जात ही कुट्टी थी, बस एक रहस्य बन कर रह गई सोनिया की ये दर्द भरी कहानी।

अमर फल

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ये कहानी उज्जैन नगरी की है l जहाँ राजा भर्तिहरि का शासन था l राजा भर्तिहरि एक सदाचारी और न्यायप्रिय राजा थे l राजा भर्तिहरि अपनी पत्नी रानी पिंगला से बहुत प्यार करते थे l रानी पिंगला रूप सौंदर्य की मालकिन थी एक कमनीय नारी थी l राजा भर्तिहरि रानी पिंगला के प्यार में जैसे पागल थे l पर भाग्य का खेल बहुत निराला था l एक दिन रानी अपने शयनकक्ष की खिड़की से अस्तबल की तरफ देख रही थी, रानी पिंगला एक अश्वपाल पर मरती थी जिसकी लम्बी कद काठी और गठीला शरीर था l रानी पिंगला उस अश्वपाल से रोज अकेले में मिला करती थी l लेकिन एक दिन राजा भर्तिहरि के छोटे भाई विक्रमादित्य ने रानी पिंगला को अस्तबल की तरफ से आते देख लिया l विक्रमादित्य ने सोचा ये बात राजा भर्तिहरि को बतानी चाहिए l विक्रमदित्य जैसे ही राजा से मिलने पहुंचे उसे पहले ही पिंगला ने राजा से मिलकर ये कहा की महाराज विक्रमादित्य की बुरी नजर मुझ पर है, राजा भर्तिहरि उसकी बातों में आ गए l राजा भर्तिहरि ने विक्रमादित्य को बिना सोचे समझे को राज्य से निकाल दिया l उसी समय सिद्ध गुरु गोरखनाथ उज्जैन राज महल पहुंचे, राजा ने उनका खूब आदर सत्कार क...