संदेश

एंजल

दुल्हन जैसे कोई सजी संवर आयी है, जन्नत से जैसे आज जमीन पर कोई परी उतर आयी है

सपनों की रानी

नागीन सी बलखाती हो तुम सपनों की रानी लगती हो तुमन,  मैंने पूछा कौन हो तुम तुमने कहा जो तुमने छोड़ दिया तेरा अतित हूँ मैं, जो मिटे ना तेरे प्यार की निशानी हूँ मैं, आओ मेरी रूहों में समा जाओ , तेरी जिन्दगी की आखिरी कहानी हूँ मैं.

मुमताज

हर जगह आपके हुस्न का आलम छाया हुआ है, मेरे दिल की तो मुमताज आप हैं, मैंने तो अपने दिल में ताजमहल बनाया हुआ है.

गज़ल

मोहब्बत में ना सही, नफरत में अपनी दो चार सुनाया करो, तेरी गाली भी मुझे ईमरती लगती है, खिड़की पे तो रोज मुलाकात होती है। कभी गली में भी मुझसे मिलने आ जाया करो। 

भूली भटियारी का महल

दिल्ली में इस हॉन्टड प्लेस का नाम आपने नही सुना होगा। दरअसल दिल्ली पुलिस ने इस जगह को गुप्त कर दिया है।शाम के 5 बजते ही दिल्ली पुलिस यहाँ एक बैरिअर् गेट लगा देती हैं। सूर्यास्त के बाद यहाँ जाना मना है। करोल बाग के बग्गा नामक लिंक रोड से एक रास्ता वीरान जंगल की तरफ जाता है।यहाँ कोई दरवाजा भी नही है। ये जगह भूली भटियारी के महलके नाम से जाना जाता है। कहते हैं तुगलक वंश के राजा का यहाँ शिकार गाह था।वे लोग यहाँ शिकार खेलने आया करते थे। और रात को यही विश्राम किया करते थे। उनके साथ उनके अतिथि भी यहाँ रात को ठहरा करते थे। अपनी रानी के साथ वो यहाँ आते थे और शिकार खेलकर रात को यहाँ रुक जाते।  । राजा ने इस महल में  रानी की हत्या कर दी थी। अभी भी रानी की आत्मा इस महल में भटकती है। यह जगह इसलिए सुनसान है जो भी इस जगह गया है,उसने डर को अनुभव किया है। या उसे नुकसान उठाना पडा है। इतिहासिक धरोहर होने के बावजूद यह महल अब जर्जर हो चुका है। कोई भी चौकीदार यहाँ एक रात से ज्यादा नही ठहर पाता,  रानी की भटकती आत्मा अब इस महल से नही जाना चाहती है। वो अब यही रहना चाहती है। यहाँ शायद किसी नकारात्मक...

मेरी गज़ल

1. खुदा का नूर हो तुम, जैसे लगता है मेरा महबूब हो तुम, क्या कहें जानेमन बहोत खूब हो तुम, बहोत खूब हो तुम।  2. तेरा प्यार का अफसाना बना हुआ है, खुदा भी तेरे हुस्न का अशिक् है जो तेरा दीवाना बना हुआ है 3. तेरे होठों से चांदनी बिखर रही है, जैसे लगता है, चांदनी अपने चांद के बाहों में सिमट रही है।  4. कभी तनहाई में तुमहे याद कर लेता हु, जब तेरी याद आती है तो कभी खुद से कभी आइने से बात कर लेता हु. 5. वो मनचले भी तेरे अंजुमन से छुट गए, बाकी जो बचा था वो तेरे रिंदे तुझे लूट गए। 

लालबाई

सन् 1890 की बात है।ये कहानी छत्तीसगढ़ की है।  जहाँ के राजा रणधीर सिंह थे। और रानी का नाम तारा था। रणधीर सिंह के दरबार में लालबाई नाम की नर्तकी थी। जो अपने नृत्य से महाराज का दिल बहलाया करती थी। जब वह नृत्य करती तो महल के दीवार पर भी उसके पैरों के घूंघरु की गूंज सुनाई देती। लालबाई के सुंदर नृत्य को देखकर रणधीर सिंह उसपर फ़िदा हो गए थे। लालबाई के नृत्य और गायन को देख, रणधीर सिंह लालबाई पर मर मिटे थे। लालबाई के मनमोहक नृत्य को देखकर राजा रणधीर सिंह ने लालबाई को राजनर्तकी  घोषित कर दिया था। राजदरबार में कोई भी पद मिलने पर उस जमाने में महल में ही उनके रहने खाने की मुफ्त व्यवस्था की जाती थी। राजनर्तकी होने के कारण लाल बाई अब महल में ही रहने लगी। लाल बाई के नृत्य का जादू रणधीर सिंह पर इस तरह सिर चढ़ कर बोल रहा था। रणधीर सिंह काम काज छोड़ कर, लालबाई के प्रेम में डूबे रहते। और उसके नृत्य का आनंद उठाया करते। लाल बाई के घूंघरु की गूँज से महल में एक अजीब सी मादकता छा जाती। रणधीर सिंह अब लालबाई के  प्रेम में कैद हो चुके थे। राजा रणधीर सिंह लालबाई के प्रेम में अपना राज काज सब कुछ ...