दानवीर कर्ण और ढाई मन सोना
अंग प्रदेश जो वर्तमान में भागलपुर के नाम से जाना जाता है। जिसका राजा कर्ण हुआ करता था।भागलपुर के निकट स्थित चम्पानगर अंग प्रदेश की राजधानी थी।कर्ण बहुत बड़ा दानवीर था और माँ चंडी का बहुत बड़ा भक्त था।मुंगेर जिला मुख्यालय से 4 किमी दुर माँ चंडी का दिव्य मंदिर है।जो बहुत ही सुदर और भव्य है।प्राचीन काल में यह बिलहरी नामक ग्राम के रुप में जाना जाता था। जिसका नाम पुष्पावती नगरी भी था।यहां माँ सती की बायीं आंख गिरी थी।यहां एक काजल मिलता है, जिसे आंखों में लगाने से रोगी को आंखों के कष्टों से मुक्ती मिलती है।यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।यहां लोगों की मुरादें पुरी होती हैं ।यहां की एक किवंदती बहुत ही प्रचलित है। राजा कर्ण सुर्योदय से पुर्व हर रोज चंडी माँ की पुजा किया करता था ।मंदिर के एक कडाहे में तेल उबलता रहता था।कर्ण उस खौलते हुए कड़ाहे में कुद जाता था।उसका मांस भक्षण करने के बाद , माँ चंडी उसे अमृत छिडक कर जिवित कर देती थी और रोज उसे ढाई मन सोना दिया करती थी।कर्ण चौराहे पर जाकर वह सोना गरीबों में दान किया करता था।कर्ण के राज्य में उसकी सारी प्रजा सुखी थी।कोई गरीब ...