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दानवीर कर्ण और ढाई मन सोना

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अंग प्रदेश जो वर्तमान में भागलपुर के नाम से जाना जाता है। जिसका राजा कर्ण हुआ करता था।भागलपुर के निकट स्थित चम्पानगर अंग प्रदेश की राजधानी थी।कर्ण बहुत बड़ा दानवीर  था और माँ चंडी का बहुत बड़ा भक्त था।मुंगेर जिला मुख्यालय से 4 किमी दुर माँ चंडी का दिव्य मंदिर है।जो बहुत ही सुदर और भव्य है।प्राचीन काल में यह बिलहरी नामक ग्राम के रुप में जाना जाता था। जिसका नाम पुष्पावती नगरी भी था।यहां माँ सती की बायीं आंख गिरी थी।यहां एक काजल मिलता है, जिसे आंखों में लगाने से रोगी को आंखों के कष्टों से मुक्ती मिलती है।यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।यहां लोगों की मुरादें पुरी होती हैं ।यहां की एक किवंदती बहुत ही प्रचलित है। राजा कर्ण सुर्योदय से पुर्व हर रोज चंडी माँ की पुजा किया करता था ।मंदिर के एक कडाहे में तेल उबलता रहता था।कर्ण उस खौलते हुए कड़ाहे में कुद जाता था।उसका मांस भक्षण करने के बाद , माँ चंडी उसे अमृत छिडक कर जिवित कर देती थी और रोज उसे ढाई मन सोना दिया करती थी।कर्ण चौराहे पर जाकर वह सोना गरीबों में दान किया करता था।कर्ण के राज्य में उसकी सारी प्रजा सुखी थी।कोई गरीब ...

लाॅकडाउन भाग 1

24 मार्च 2020 से कोरोना संक्रमण के कारण देश में लाॅकडाउन की घोषणा कर दी गई। सभी अपने घरों में रहेंगे इसकी सलाह दी गई । राशन की दुकान और दवा दुकान खुली रहेगी । ताकि लोगों को जरुरत की चीज़ें मिल सके ।इमरजेन्सी सेवाएँ जारी रहेगी जैसे अस्पताल, बैंक। पुलिस 24/7 डयुटी करेगी। सरकार की तरफ से गरीबों और मजदुरों को घर पर खाना पहुंचाने की व्यवस्था की गई।सरकार से लेकर कई ट्रस्‍ट्‌ खाना गरीबों तक पहुंचाने का काम करने लगे।पर मजदुर जो रोज कमाते हैं खाते हैं ।उनका जीना मुहाल हो रहा था।फैक्ट्रियों बंद हो चुकी थी। उनके लिए रोजगार के रास्ते बंद हो चुके थे।उनको दो वक्त का खाना ही मुहैया कराना ही काफी नही था।उनका जीना मुहाल हो रहा था ।आखिर कब तक वो शहर की तंग जिंदगी जीते ।दिल्ली एवं गाजियाबाद में रह रहे सभी मजदूर लाॅकडाउन तोडकर घर से निकल पड़े।सड़क पर हजारों मजदुरों की भीड़ इकट्ठी हो गई ।और इस तरह लाॅकडाउन की धज्जियां उड गई ।कोई परिवार बीवी- बच्चों के साथ तो कोई अकेला ।उनकी दुनिया उजड़ चुकी थी। यातायात साधन उपल्बध नही होने के कारण सभी पैदल ही अपने होमटाउन की अर निकल पड़े ।अब सरकार के पास एक बड़ी समस्य...

कोरोना का कहर

चीन के वुहान से आया ये कोरोना वायरस पुरी दुनिया पर कहर बरपा रहा है। चीन ने कुत्ते, बिल्ली, चमगादड़    खाकर ये वायरस फैलाया। और इसकी सजा भुगत रहा है पुरा विश्व । उनका इस तरह से जानवरों को खाना काफी घृणित है।ये वाकई में चमगादड़ से आया वायरस है या  चीन के लैब में तैयार किया गया कोई जैविक बम।जिसे चीन के द्वारा दुनिया पर छोड़ दिया गया । उसकी एंटी पहले से चीन ने बना ली थी।इसलिए शुरुआती दौर में चीन पर इसका असर देखा गया । पर अब चीन में इसका कोई असर नही क्यों। वुहान के लोग अब खुली सांस ले रहे हैं।चीन के व्यापारिक क्षेत्र बीजिंग, शंघाई में इसका कोई असर नही। ये सारे तथ्य चीन को संदेहास्पद बनाते हैं।क्या चीन ने दुनिया की अर्थव्यवस्था तोड़ने के लिए ये तरकीब अपनायी थी।कोरोना वायरस को पहले चीन ने छुपाया क्यों। विश्व स्वास्थय संगठन ने इसे पेनडैमिक क्यों नही बताया। ताकि पुरे विश्व में ये नही फैले । क्या चीन की विश्व स्वास्थय संगठन से मिली भगत थी।अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन को कोरोना वायरस फैलाने का दोषी बताया ।दुनिया का सबसे ताकतवर देश इस कोरोना के सामने घु...

मर्लिन मुनरो - भाग 3 ( मर्लिन की मिलर से दुरी)

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 ड्रग्स की बुरी लत ने मर्लिन को इस मुकाम तक पहुंचा    दिया था। जहां से वो लौट नही सकती थी।ये मर्लिन की जिंदगी से कभी भी खेल सकती थी।इस पारिवारिक विवाद से मर्लिन काफी सदमें में थी।फिर भी मिलर ने मर्लिन से कहा की पिछली बातों को भुलाकर मै तुम्हारे भविष्य को संवारुगा ।मर्लिन को मिलर के खो जाने का डर था।वह मिलर से दुर हो जाएगी इससे वह काफी डिप्रेशन में थी ।उसने अपने रिश्ते को बचाने का प्रयास किया। मिलर ने कहा कि मर्लिन मौत को हथेली पर लेकर घुमती थी।उसे अपने आप को मार डालने का नशा था।मर्लिन ने हनीमून मनाने का फैसला किया ।एक फिल्म की शुटिंग के सिलसिले में वह मिलर के साथ हनीमून मनाने लंदन पहुंचीं ।पर अफसोस वहां भी वो दोनों पल भर भी एक-दूसरे के साथ समय नही बीता सके।गलैमर वर्ल्ड और शोहरत तो मर्लिन के साथ साथ थी ।मर्लिन जहाँ जहाँ जाती लोगों की भारी भीड़ जमा हो जाती ।कई फोटोग्राफर मर्लिन का फोटो अपने कैमरे में कैद करने के लिए भीड़ लगा देते ।मर्लिन 27 सुटकेस लेकर लंदन पहुंचीं थी। फिर भी दोनों न साथ रहकर बातें कर पाए। न प्यार के कोई पल बीता पाए।दोनों के बीच दुरियां बढती गई ...

मर्लिन मुनरो- भाग 2( मर्लिन मुनरो की आर्थर मिलर से शादी)

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मर्लिन ने कहा शरीर का मतलब प्रदर्शन से है न कि उसे ढंकने से। शायद वह ऐसा सोचती थी जिस ऊपरवाले ने गुलाब  की तरह ये खुबसूरत शरीर बनाया है। लोग ईश्वर की बनाई इस खुबसूरत रचना को देखें। उन्होंने  मित्रों को सबसे बड़ा बताया। मित्र आप जैसे हैं आपको उसी रुप में स्वीकार करते हैं । मर्लिन ने पुरुषों की इस मामले में बहुत तारीफ की और कहा ।पुरुष ही तुम्हें अहसास दिला सकते हें कि तुम एक औरत हो।अपने प्यार से पुरुषों के जीवन में रंग भरनेवाली औरत ही तो है। जिससे मै बहुत गौरवान्वित महसूस करती हुं।वो बहुत रोमांटिक औरत थी।पुरुष ही तुम्हें स्पर्श कर , तुम्हारी आंखों में घुरकर तुम्हें रोमांचित कर सकता है।वो कहना चाहती थी कि पुरुष ही औरत को पूर्णता का अहसास दिलाते हैं ।मर्लिन फाॅकस स्टुडियो में नाइट क्लब का सीन दे रही थी ।काले सटॄप वाली ड्रेस में उसके होंठों की मधुर मुस्कान ने लाखों दिलों की धड़कनों में हलचल मचा दी हो।  मर्लिन लाखों लोगों के दिलों पर राज करने लगी। इस सीन को देखते ही मशहूर लेखक आर्थर मिलर के दिल की धड़कनें भी तेज हो गई ।जैसे मर्लिन उसके जान में समा गई हो।सेट पे ...

मर्लिन मुनरो - भाग 1

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मैं अब जिनके बारे में लिखने जा रहा हुं।शायद उनकी जीवनी लिखने के लिए मेरे शब्द कम पङेंगे। हाॅलीवुड की मशहूर सेक्सी अदाकारा मर्लिन मुनरो। जिनका मुल नाम नोर्मा जीन मोर्टेनसेन  था ।जिनका जन्म 1जुन 1926 को हुआ था। हालीवुड में सेक्स सिंबल के  रुप में जानी जाने लगी।1950 के दशक में इनकी फिल्मों ने खुब ख्याति बटोरी। मर्लिन ने अपनी फिल्म  सेवन इयर ईंच से हाॅलीवुड में धुम मचा दी।सेवन इयर ईंच में मर्लिन की उडती हुई स्कर्ट के सीन ने लोगों के होश उडा दिये । मर्लिन मुनरो अमेरिका की मशहूर अभिनेत्री ,माॅडल और गायिका।  मर्लिन के हुस्न के चर्चे और मुस्कान के सभी कायल थे। मर्लिन की कामयाबी ने उसे  रातोंरात सुपरस्टार बना दिया।मर्लिन ने अपने बारे में लिखा कि मैं अच्छी हुं लेकिन परी नही। मैं पाप तो करती हुं लेकिन मैं शैतान नही। अपने पाप को स्वीकार कर लेना मर्लिन को उसके सारे गुनाहों से मुक्त करता है। मर्लिन ने अपने बारे में कहा था कि मुझे सेक्स पसंद है ।मैं प्रकृति हुं।मैं इसके साथ चलना पसंद करती हुं। मर्लिन ये बताना चाहती थी लोगों को कि प्यार और सेक्स जिंदगी का...

औरत - भाग 2

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औरत से ही घर शोभा पाता है।औरत ही पुरुषों का घर रचाती बसाती है ।फर भी सदियों से जुल्म सहती आ रही है औरतें । जो कभी रुकने का नाम नही लेता। कब मिलेगी इन्हे इस पुरुष प्रधान समाज में आजादी ।घुट घुट कर सांस लेती।मुझे अभी भी सुनाई दे रही है उनकी सिसकियाँ ।मुझे अब उस महुआ घटवारिन की कहानी याद आ जाती है। महुआ के प्यार की दर्द भरी दास्तान ।जो पुरुष के द्वारा छली गयी।महुआ नदी के तट पर रहनेवाली एक जवान लङकी की कहानी है ।जो अपनी सौतेली माँ के जुल्म को सहती नवयौवना बनी।महुआ की सौतेली माँ ने उसे किसी सौदागर के हाथों बेच दिया ।महुआ ने सौदागर के साथ नाव पर नदी पार करते हुए नदी में छलांग लगा दी ।उस सौदागर के सेवक को भी महुआ से प्यार हो गया था।यह देख उसने भी नदी में छलांग लगा दी ।महुआ एक घटवारिन थी ।नदी में तैरना भलीभांति जानती थी।वो नदी के विपरीत दिशा में भी तैरते हुए किनारे तक आ गयी।पर वो सौदागर का सेवक नदी में ङुबने लगा।महुआ ने तैरकर उसकी जान भी बचाई।इस तरह वो सौदागर के चंगुल से बच निकली।सौदागर का सेवक भी महुआ से प्यार करने लगा था।दोनों ने साथ जिंदगी बिताने का निशचय किया। वो लङ...