सपना

कभी अपने अरमानों को संजोए हुए, दुख के बोझ से दबी हुई । मन ही मन रोई हो।  हो अरमान तुम्हारे पुरे यही ऊपरवाले से फरियाद करती हो। बुलंद रखना अपना हौसला।कुछ जल गए कुछ बुझ गए। अपने अरमानों का दीया तुम जलाये रखना । एक दिन तुम्हारी जय होगी,लहरें किनारों से टकरायेगी। एक दिन तु भी अपनी मंजिल पायेगी।तु भी अपनी मंजिल पायेगी।

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