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लालबाई

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सन् 1890 की बात है।ये कहानी छत्तीसगढ़ की है।  जहाँ के राजा रणधीर सिंह थे। और रानी का नाम तारा था। रणधीर सिंह के दरबार में लालबाई नाम की नर्तकी थी। जो अपने नृत्य से महाराज का दिल बहलाया करती थी। जब वह नृत्य करती तो महल के दीवार पर भी उसके पैरों के घूंघरु की गूंज सुनाई देती। लालबाई के सुंदर नृत्य को देखकर रणधीर सिंह उसपर फ़िदा हो गए थे। लालबाई के नृत्य और गायन को देख, रणधीर सिंह लालबाई पर मर मिटे थे। लालबाई के मनमोहक नृत्य को देखकर राजा रणधीर सिंह ने लालबाई को राजनर्तकी  घोषित कर दिया था। राजदरबार में कोई भी पद मिलने पर उस जमाने में महल में ही उनके रहने खाने की मुफ्त व्यवस्था की जाती थी। राजनर्तकी होने के कारण लाल बाई अब महल में ही रहने लगी। लाल बाई के नृत्य का जादू रणधीर सिंह पर इस तरह सिर चढ़ कर बोल रहा था। रणधीर सिंह काम काज छोड़ कर, लालबाई के प्रेम में डूबे रहते। और उसके नृत्य का आनंद उठाया करते। लाल बाई के घूंघरु की गूँज से महल में एक अजीब सी मादकता छा जाती। रणधीर सिंह अब लालबाई के  प्रेम में कैद हो चुके थे। राजा रणधीर सिंह लालबाई के प्रेम में अपना राज ...

नेहरू और एडविना का प्रेम

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नेहरू जब एडविना से मिले। तब नेहरू एडविना को अपना दिल दे चुके थे । मैं 2 feb, 2021 को इंटर नेट देख रहा था। तभी इंटरनेट पर मेरी नजर नेहरू और एडविना की तस्वीर पर पड़ी। जिसपर नेहरू एडविना के होठों का चुम्बन ले रहे थे। कमला कौल की मौत के बाद ऐसा भी नही था। की नेहरू को कोई सदमा था। अगर कमला की मौत का उन्हें सदमा होता तो वो एडविना से कभी इश्क नही लड़ाते। एडविना लार्ड माउंटबेटन की वाइफ थी। जिन्होंने नेहरू और एडविना की बढ़ती नजदीकियों में कभी रोक लगाने की कोशिश नही की। और ना उनके रिश्तों में कभी दखलअंदाजी की। बल्कि इस रिश्ते को इसलिए  बढ़ावा दिया की,भारत का आसानी से बंटवारा हो सके। वे इसमें अपनी राजनिति साध रहे थे। बात सन् 1948 की  है। नेहरू 58 साल के थे, और एडविना 48 की। एडविना जहाँ भी घूमने जाती । नेहरू वहाँ ज़रुर जाते और वहाँ एडविना से उनका मिलना जुलना होता रहता। एक बार नेहरू नैनीताल गए थे। जहाँ रूसी मोदी ने अपने बेटे से कहा, नेहरू को डिनर के लिए बुला लो। जब मोदी के बेटे ने नेहरू को डिनर पे बुलाने के लिए,  होटल के कमरे का डोर ओपन किया तो नेहरू ने एडविना को अपनी बाह...

जंगल की चुड़ैल

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सन् 2005 की बात है। मेरे यहाँ राजु माँ नाम की एक बाई काम किया करती थी। उसकी उम्र करी ब 60 साल की थी। भूत प्रेत जैसी चीजों में दिलचस्पी होने के कारण एक दिन मैंने उनसे पूछा, राजु माँ आपने कभी भूत प्रेत देखा है। तभी उन्होंने मुझे अपनी कहानी सुनाई। सन् 1960 की बात है। मेरी शादी हुई थी। उस समय भागलपुर के बु ढा नाथ इलाके में जंगल हुआ करता था।शाम का समय था। मैं अपने मर्द के साथ बैलगाड़ी पर अपने ससुराल जा रही थी। बैलगाड़ी वाला अपनी गाड़ी जंगल में हाँक रहा था। हा हा हर र। रात हो चुकी थी। जंगल काफी बड़ा था।रास्ता नही दिखने के कारण गाड़ी वान ने लालटेंन जला ली। और बैल गाड़ी को जंगल में हाँकने लगा। हा हा हर र हर र चल चल। चलते चलते अचानक से बैल रुक गयी। बैल आगे नही बढ़ रही थी। बैलगाड़ी वाला कुछ समझ नही पाया। गाड़ी आगे क्यों नही बढ़ रही है। उसने देखा बैल गाड़ी का रास्ता रोके एक औरत खड़ी है। बैल चुपचाप अपनी जगह खड़ी थी। राजु माँ भी कुछ समझ नही पायी। तभी राजु माँ अपने पति से बोली, देखो तो उतर कर  गाड़ी आगे क्यों नही बढ़ रही है। राजू माँ के पति ने बैलगाड़ी से नीचे उतर कर देखा तो अचंभित र...

प्राइवेट जॉब

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मेरा मूड काफी खराब था. लूथरा साहब की बदतमीजी बढ़ती जा रही थी। मैनें भी सोच रखा था। आज लूथरा ने कुछ बोला। तो मै उसकी बेइज्जती करूँगा। मैं पेपर पर कुछ काम कर रहा था, तभी पता चला, लूथरा ने बुलाया है। फिर गेट पे CCTV मशीन खराब होने के कारण Mr. लूथरा मुझे सुनाने लगा। उस दिन सभी के बीच मैंने उसे पुरा सुना दिया। सभी के बीच उसकी इज्जत उतार दी। वह सहमा हुआ चुपचाप मुझे देखता रह गया।मैं वहाँ से चला गया। फिर मैं सोचने लगा। आज मैं भी काफी बड़े पोस्ट पे होता। मैं भी अपने बॉस का चमचा होता। औरों की तरह तरक्की के लिये मैं भी किसी के तलवे चाट लेता। पर मुझसे ये हो ना सका। मैं अपने जमीर को नही मार सका। मैं अपने मेहनत की कमायी खाना चाहता था। इसलिए शायद मुसीबत हमेशा मेरे साथ साथ चलती है। जो सही राह पे चलनेवालों को आगे नही बढ़ने देती है। मैं उस दिन लूथरा साहब का ऑफिस छोड़ चुका था। मैं बहोत खुश था। क्यों कि मैं लूथरा से छुट कारा पाना चाहता था। मैं घर पहुंचा। अपनी बीवी को सारी बात बतायी।वो काफी चिंतित हो गयी।  फिर मैंने उसके हाथों में कंपनी का चेक दिया। जो मेरे अंतिम महीने का वेतन था। मैंने चेक...

अशोक विहार का फ्लाई ओवर

अगर आप किसी फ्लाई ओवर से गुजर रहे हैं तो सावधान हो जाइये , क्यों कि ये गुडगांव अशोक विहार का फ्लाई ओवर काफी डरावना है।ये फ्लाई ओवर रात होते ही एक अजीब सी शक्ल अख्तियार करता है। यहाँ अक्सर एक उजली साड़ी पहने एक औरत दिखाई देती है। जो आने जाने वाली गाड़ियों के ड्राइवर से रास्ता पूछती है। जो भी ड्राइवर उसे गाड़ी रोक कर रास्ता बताता है, उस गाड़ी की ब्रेक फेल हो जाती है और गाड़ी गोल गोल घूमने लगती है। यह घटना अक्सर रात 1AM से 4 AM के बीच होती है। अगर आप भी इस फ्लाई ओवर से गुजर रहे हैं तो अपनी गाड़ी कभी ना रोके, ये उजली साड़ी वाली औरत हर अक्सर आने जाने वालों से रास्ता पूछती है। क्या पता इसका अगला शिकार आप हो सकते हैं। आपकी भलाई इसी में है की आप जान बचाकर वहाँ से निकल लें। क्या पता वो आपकी आखिरी रात हो। आखिर इस औरत की आत्मा आने जाने वालों से रास्ता क्यों पूछती है। इस औरत की आत्मा यहाँ क्यों भटकती है। ये बस एक रहस्य है। क्यों हर रात ऐसी घटना घटती है, कोई नही जानता। ये सारे सवाल शायद आपको परेशान कर दें। आप मुझ पर यकीन करें ना करें पर ये सच है। 

saffron call center

गुडगाँव में कब्रिस्तान के ऊपर बना सैफरन कॉल सेंटर कहते हैं यहाँ रोज नाम की लड़की काम किया करती थी. वो हमेशा employee of the month ka अवार्ड जीत जाती थी। वो अक्सर फोन पर बाते किया करती थी। कुछ ही दिनो के बाद वो लम्बी छुट्टी  पर चली गयी। जब वो काफ़ी दिनो बाद भी काम पर नही लौटी तो उसके सहकर्मी उसके घर पर पहुंचे, जहाँ वो किराए के मकान पे रहा करती थी। वहाँ उन्होंने रोज के माँ बाप से मुलाकात की। उन्होंने बताया की रोज को मरे तो आठ साल हो गए। उसके सहकर्मी  यह सुनकर अवाक रह गए। उनलोगों के हाथ पाव सुन्न हो गए। कहते हैं रोज की आत्मा अभी भी रात को वहाँ दिखाई देती है। फोन 📞 से रात को कोई लड़की ऑफिस  में दिखाई देती है। फिर अचानक से वो गायब हो जाती है। कॉल सेंटर का वो बूढ़ा चौकीदार मुझे बता रहा था। 

लहर

                                             लहर सागर की  लहरों  सी  चंचल   हो  तूम , बस  अपनी  मौजों  मे बहती जाती  हो, कभी बलखाती, कभी इठलाती,  बहती जाती अल्हड सी अपनी मस्ती में तुम , मैंने पूछा तुसे कहाँ जा रही हो तुम  , मुस्काते हुए तुमने कहा पता अहि इन्ही लहरों से पूछो मेरी मंजिल , मेरे पीछे ना आना कहीं तुम्हेंअपनी लहरों के साथ बहाना ले जाऊं, लहर हूँ मैं दुर कहीं चली जाउंगी, एक झलक दिख जाउंगी, पास नही मै आउंगी, अपने किनारों पर अपना अक्श छोड़ जाउंगी . तुम ढूंढते रह जाओगे. मुझे किनारों पर, पर मै अपने लहरों संग दुर चली जाउंगी , कहीं दुर चली जाउंगी .